अस्सलाम वालेकुम
हमारे पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान हजरत इबाराहीम के खानदान से थे, हजरत इबाराहीम इराक से होते हुए वह मक्का शरीफ मे अपने सबसे छोटे औलाद इस्माइल को रहने को कहा जब इब्राहिम जवान हुए तब अपने वालिद इब्राहिम को मक्का ले जा कर अल्लाह कि एक इबादत करने के लिए काबा सरीफ कि तामीर करवाया था
हमारे पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान हजरत इबाराहीम के खानदान से थे, हजरत इबाराहीम इराक से होते हुए वह मक्का शरीफ मे अपने सबसे छोटे औलाद इस्माइल को रहने को कहा जब इब्राहिम जवान हुए तब अपने वालिद इब्राहिम को मक्का ले जा कर अल्लाह कि एक इबादत करने के लिए काबा सरीफ कि तामीर करवाया था
हजरत इस्माइल के साठवी पीढ़ी के बाद अब्दुल मुतालिब का जन्म हुआ इस कबिले का नाम कुरैश था अरब के सारे परिवारों मे सबसे अच्छा अफ़ज़ल आलिम और सबसे ऊंचे परिवार इन्हे ही समझा जाता था इस खानदान से कई लोगो का पैदाइश हुई जो काबाशरीफ कि हिफाज़त के साथ साथ आमिल फ़ाज़िल हुए थे अबू मुतालिब हमारे पैग़म्बर के दादा जान थे अबू मुतालिब ने जमजम का कुवा जो बंद था उसे साफ कराया
अबू मुतालिब के दस बेटे थे जिसमे एक का नाम अब्दुल्लाह था जो हमारे पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहेब के वालिद थे
अबू मुतालिब के दस बेटे थे जिसमे एक का नाम अब्दुल्लाह था जो हमारे पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहेब के वालिद थे
हमारे पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का पैदाइश नौ रबिअव्वल को हुआ आपके दादा जान अब्दुल मुतालिब को यह खबर उन्होंने मुहम्मद साहेब को काबा शरीफ ले गए और अल्लाह का शुक्र अदा किया और दुआ मांगी आप के पैदाइश के सातवे दिन अब्दुल मुत्तलिब ने अकीका किया और उनका नाम मुहम्मद रखा मुहम्मद उस समय अरब मे यह नाम नया था
मुहम्मद नाम अरब मे नया था अरब मे यह चालन था के आपने बच्चे को रेगिस्तान मे रहने वाले महिला को दूध पिलाने के लिए सौंप देते थे ताकि बच्चे का तरबियत अच्छे से हो जब आमिना का मुहम्मद को दूध पिलाने के लिए एक नेक और सच्ची औरत खोज रही थी हलीमा मां रेगिस्तान के रहने वाली थी वह होने उठ को लेकर आई थी और वह उठ आमिना के घर के पास जा कर बैठ गया और इस तरह हलीमा ने हमारे हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पालने के लिए अपने साथ ले गए मुहम्मद साहेब के पास दो वर्ष और कुछ ही महीने उनके पास रहे और फिर वह मक्के आ गए जब वह छ वर्ष हुआ था आप कि मां का इन्तेकाल हो गया जब आप आठ वर्ष के हुए तो आप के दादा का इन्तेकाल हो गया
दादा के इन्तेकाल के बाद आप अबू तालिब चाचा कर पास रहे अबू तालिब हिजरत (रोजगार) करने के लिए आप बाहर जाने लगे तो आप भी साथ जाने लगे
हिजरात करने के लिए बसूरा शहर गए थे तब एक ईसाई धर्म का धर्म गुरु प्राचीन किताबें से उसे कुछ निसानिया पता चूका था कि एक खुदा पैगम्बर आने वाला हैँ और उसने इसे पहचान लिया और हुक्म दिया यें अबुतालिब इसे जल्द से जल्द अपने मक्का ले जाओ और यहूदी से इन्हे बचाओ....Next लिंक Here Click
हिजरात करने के लिए बसूरा शहर गए थे तब एक ईसाई धर्म का धर्म गुरु प्राचीन किताबें से उसे कुछ निसानिया पता चूका था कि एक खुदा पैगम्बर आने वाला हैँ और उसने इसे पहचान लिया और हुक्म दिया यें अबुतालिब इसे जल्द से जल्द अपने मक्का ले जाओ और यहूदी से इन्हे बचाओ....Next लिंक Here Click






No comments:
Post a Comment